पूर्व सेना प्रमुख ने बताई गलवान की पूरी कहानी, चीन सालों तक नहीं भूल पाएगा भारतीय सेना की ‘मार’

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वीके सिंह ने कहा कि बेशक चीन कभी नहीं बताएगा कि उसके कितने लोग हताहत हुए हैं, लेकिन मैं समझता हूं कि जिस तरह से भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों को जवाब दिया था, उससे 40 से ज्यादा चीनी सैनिक हताहत हुए हैं।

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में एलएसी पर बीते दिनों भारत और चीन के फौजियों के बीच हुए हिंसक झड़प को लेकर केन्द्रीय मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह ने कई बड़े दे किये हैं, उनके मुताबिक चीनी टेंट में अचानक आग लग गई थी, जिसके बाद भारत और चीन की सेना के बीच झड़प शुरु हुई, पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि ये कह पाना मुश्किल है, कि चीनी सैनिकतों ने टेंट में क्या रखा था, जिससे आग लगी।

टेंट में आग लगी
एबीपी न्यूज से बात करते हुए वीके सिंह ने कहा कि 15 जून की शाम हमारे कमांडिग अफसर गलवान घाटी में देखने गये थे, कि चीनी सैनिक पीछे हटे हैं या नहीं, Galwan2 कमांडिंग अधिकारी ने कहा कि चीन के लोग पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास ही हैं, उन्होने हमसे इजाजत लेकर वहां टेंट लगाया था, इस दौरान दोनों सेनाओं के बीच कुछ कहासुनी हो गई, हमारे अधिकारी ने तंबू हटाने का आदेश दिया, इसी दौरान चीन के टेंट में आग लग गई थी।

दोनों के बीच हिंसक झड़प
वीके सिंह ने बचाया कि इस झड़प के दौरान हमारे लोग चीनी सेना पर भारी पड़े, जिसके बाद चीन ने अपने और लोग बुलाये, हमारे लोगों ने भी अपने और जवान बुला लिये, चीन के लोग जल्दी आ गये, फिर हमारे लोग भी आये, अंधेरे में 500-600 लोगों के बीच झड़प हुई, रिपोर्ट के अनुसार पूर्व सेना प्रमुख ने दावा किया, कि पहले हमारे तीन लोग हताहत हुए, फिर दोनों सेना आपस में भिड़ गयी, चोट और नदी में गिर जाने की वजह से हमारे 17 और जवान शहीद हो गये, कुल 20 जवान हमारे जबकि चीन के 70 के करीब जवान घायल हो गये थे।

40 से ज्यादा मारे गये
वीके सिंह ने कहा कि बेशक चीन कभी नहीं बताएगा कि उसके कितने लोग हताहत हुए हैं, लेकिन मैं समझता हूं कि जिस तरह से भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों को जवाब दिया था, उससे 40 से ज्यादा चीनी सैनिक हताहत हुए हैं। 15 जून की रात गलवान घाटी में एक बार नहीं बल्कि तीन बार भारत और चीन के सैनिकों के बीच लड़ाई हुई, भारतीय जवानों पर चीन के सैनिकों ने धोखे से हमला किया, इसके बावजूद भारतीय सेना के बिहार रेजीमेंट, पंजाब रेजीमेंट और थ्री मीडियम रेजीमेंट के सैनिकों ने ऐसा जवाब दिया, जिसे चीन के सैनिक सालों तक याद रखेंगे।