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सुहास की शुरुआती पढाई गांव में हुई, फिर एनआईटी सूरतकल से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की, 2005 में अचानक पिता की मौत हो गई, जिसके बाद वो टूट गये।

दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर के डीएम सुहास एल वाई देश के पहले ऐसे आईएएस अधिकारी होंगे, जो टोक्यो पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं, वो 2007 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, उनकी गिनती यूपी के तेज-तर्रार अधिकारियों में की जाती है, साथ ही दुनिया के दूसरे नंबर के पैरा बैडमिंटन प्लेयर भी हैं।

आईएएस नहीं बनना चाहते थे
कर्नाटक के छोटे से शहर शिगोमा में पैदा हुए सुहास ने अपनी तकदीर अपने हाथों से लिखा है, जन्म से दिव्यांग (पैर में परेशानी) सुहास पहले आईएएस बनना नहीं चाहते थे, बचपन से ही उनकी दिलचस्पी खेल में थी, इसके लिये उन्हें पिता और परिवार का भरपूर साथ मिला, पैर पूरी तरह फिट नहीं था, ऐसे में समाज के ताने उन्हें सुनने को मिलते, लेकिन पिता और परिवार चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा रहा, कभी भी सुहास का हौसला टूटने नहीं दिया। सुहास के पिता उन्हें सामान्य बच्चों की तरह ही मानते थे, सुहास का क्रिकेट प्रेम भी पिता की ही देन है, परिवार ने कभी नहीं रोका, जो मर्जी हुई वो गेम खेले, पिता ने बी उनसे हमेशा जीत की उम्मीद की, पिता की नौकरी ट्रांसफर वाली थी, सो वो अलग-अलग शहरों में घूमकर पढते रहे।

इंजीनियरिंग के बाद यूपीएससी
सुहास की शुरुआती पढाई गांव में हुई, फिर एनआईटी सूरतकल से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की, 2005 में अचानक पिता की मौत हो गई, जिसके बाद वो टूट गये, सुहास ने बताया कि उनके जीवन में पिता का खास स्थान था, पिता की कमी खलती रही, इस बीच उन्होने ठान लिया कि अब सिविल सेवा में जाना है, फिर क्या था, सबकुछ छोड़कर यूपीएससी की तैयारी में जुट गये। 2007 में सफलता मिली, पहली पोस्टिंग आगरा में हुई, फिर कई जिलों में डीएम पद पर रहे, इतने बड़े अधिकारी बनने के बाद भी सुहास नहीं रुके।

इंटरनेशनल मैच खेलना शुरु किया
जिस खेल को वो पहले शौक के तौर पर खेलते थे, वो बाद में उनका जुनून बन गया, वो ऑफिस की थकान मिटाने के लिये बैडमिंटन खेलते थे, लेकिन तब कुछ प्रतियोगिताओं में मेडल आने लगे, तो फिर इसे प्रोफेशनल तरीके से खेलना शुरु किया, 2016 में उन्होने इंटरनेशनल मैच खेलना शुरु किया, चाइना में खेले गये बैडमिंटन टूर्नामेंट में सुहास अपना पहला मैच हार गये, लेकिन इसके बाद उन्हें जीत का फॉर्मूला मिल गया। आपको बता दें कि पैरालंपिक की शुरुआत 24 अगस्त से हो रही है, ये 5 सितंबर तक चलेगा, भारत के अभियान की शुरुआत 27 अगस्त को होगी, उस दिन तीरंदाजी में भारतीय पुरुष और महिला का मैच है, सुहास का कहना है कि उनकी प्राथमिकता प्रशासनिक सेवा है, काम के बाद जो भी समय मिलता है, उसमें बैडमिंटन प्रैक्टिस करते हैं।

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