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आरोपियों ने बताया कि वो सिर्फ एसी कोच में वारदात को अंजाम देते थे, ये महिलाओं को टारगेट करते थे, इस दौरान लापरवाही से सोए लोगों के सामान को चोरी करने के साथ अगर कोई विरोध करता था, तो उससे लूटपाट कर फरार हो जाते थे।

रेलवे लाइन को समझने के बाद सिर्फ 7 से 10 मिनट में वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के 4 बदमाशों की गाजियाबाद जीआरपी ने गिरफ्तार किया है, बदमाशों ने ना सिर्फ ट्रैक के सिस्टम को समझा, बल्कि उसकी टाइमिंग के मुताबिक अपनी रफ्तार को बनाया था, वारदात के बाद कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता था। जीआरपी प्रभारी अमीराम सिंह ने बताया कि आरोपियों के नाम मुलायम सिंह यादव, मुकेश, सचिन और आदित्य है, जिसके पास से 1 लाख रुपये से ज्यादा की ज्वेलरी, लैपटॉप, कई मोबाइल समेत अन्य सामान बरामद किया गया है, मुलायम सिंह यादव गिरोह का लीडर है, वही वारदात की प्लानिंग करता था, गैंग के दूसरे बदमाश के बारे में पुलिस जानकारी इकट्ठा कर रही है।

प्राइवेट फैक्ट्री में काम
पूछताछ में ये सामने आया है कि आरोपी साहिबाबाद रेलवे ट्रैक के पास पीडीएम नाम की फैक्ट्री में नौकरी करते थे, पुलिस को बीते कुछ दिनों से उसी प्वाइंट के आस-पास लगातार वारदात की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा बढाई, गैंग के बारे में जानकारी हुई और उन्हें गिरफ्तार किया गया। जीआरपी प्रभारी ने बताया कि फैक्ट्री के बाद रेलवे लाइन पर कैंची बनती है, जहां से ट्रेन आनंद विहार, निजामुद्दीन और नईदिल्ली रेलवे स्टेशन के लिये जाती है, इस कैंची पर 5-10 मिनट ट्रेन की रफ्तार कम होती है, जिसका फायदा गैंग के लोग उठाते हैं।

बरामद हुआ चोरी का सामान
आरोपियों ने बताया कि वो सिर्फ एसी कोच में वारदात को अंजाम देते थे, ये महिलाओं को टारगेट करते थे, इस दौरान लापरवाही से सोए लोगों के सामान को चोरी करने के साथ अगर कोई विरोध करता था, तो उससे लूटपाट कर फरार हो जाते थे। एसी कोच में वारदात के सवाल पर आरोपियों ने बताया कि ऐसे कोच में लोग स्लीपर की तुलना में कम अलर्ट होते हैं, साथ ही महिलाओं के बैग में पुरुष की तुलना में ज्यादा कीमती सामान होता है।

कोडवर्ड में करते थे बात
वारदात के बाद पूरा गिरोह एक-दूसरे से कनेक्ट होता था, वो कई कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे, महिला का सामान चोरी होने पर चप्पल मिल गई, जेब काटने पर कटिंग हो गई और किसी के पकड़े जाने पर गार्ड को बुलाओ कहा करते थे। ये सभी काम 5-10 मिनट के भीतर ही होता था, वारदात को करने के बाद वो फैक्ट्री में चले जाते थे, जिससे पुलिस को उनकी जानकारी नहीं हो पाती थी। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि एमपी, यूपी, हरियाणा, राजस्थान समेत कई रुट पर ट्रेनों में वारदात को अंजाम दे चुके हैं, हाल के दिनों में फैक्ट्री में नौकरी कर साहिबाबाद वाले प्वाइंट पर वारदात कर रहे थे, मुकेश का दूसरे राज्यों का आपराधिक इतिहास मिला है, वो तीन बार पहले भी जेल जा चुका है।

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