पहाड़ियों के लिए अमृत है काफल, कुक्कू चिड़िया बताती है पक गया फल, जानिए किन बीमारियों के लिए है ‘वरदान’

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उत्तराखंड को देवों की भूमि के नाम से जाना जाता है. यहां देवों के आशीर्वाद के साथ-साथ प्रदेश को प्रकृति का भी आशीर्वाद मिला हुआ है. यहां के जंगलों में जड़ी-बूटियों का भंडार है जिनसे कई बीमारियों का इलाज होता है. इसके अलावा कुछ ऐसे फल भी हैं जो खाने में जितने स्वादिष्ट होते हैं उतने ही सेहत के लिए लाभकारी होते हैं. इन्हीं फलों की सूची में शामिल है काफल. वैसे तो इस फल का नाम सुनते ही प्रदेश के लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. फल के एक नई बल्कि कई फायदे हैं. लेकिन, हम आपको उस कहानी से पहले रूबरू कराएंगे जिसे आपने बचपन में किताबों में या बड़ों-बुजुर्गों से जरूर सुना होगा.

‘काफल पाको मैं नि चाखो’
बचपन में सुना था कि, एक महिला और उसकी बेटी थी. गर्मियों का मौसम था और महिला जंगल से ताजे काफल लेकर आई थी. महिला ने काफल से भरी टोकरी अपने आंगन में रख दी और लकड़ी लाने के लिए जंगल जाने लगी तो बेटी से कहा कि, काफल मत खाना. जब वो जंगल से आ जाएगी तो उसे खुद काफल खिलाएंगी. बेटी ने मां की आज्ञा का पालन किया और अपने खेल में लग गई. पर जैसे ही दोपहर हुई तो काफल से भरी टोकरी सूख गई.ये जब महिला ने देखा तो वह आगबबूला हो गई और बेटी को खूब मारा. kafal-fruitक्योंकि, महिला को लगा की उसकी बेटी सारे काफल खा गई. मार-मारते उसकी बेटी मर गई. ये सारी घटना एक पेड़ पर बैठी चिड़िया देख रही थी और जैसे ही शाम हुई तो वह बोली- ‘काफल पाको मैं नि चाखो’. यानि काफल पक गए पर मैंने नहीं चखे. महिला ने काफल की टोकरी की तरफ देखा तो उसकी आंखें चमक गई क्योंकि, काफल गर्मी की वजह से सूख गए थे और जैसे ही ठंड हुई तो वो पहले की तरह हो गए. ये देख महिला को अपनी गलती पर अफसोस हुआ और वह अपने बेटी के शव के पास बैठकर रोने लगी. आखिर में महिला भी भगवान को प्यारी हो गई.

कुक्कू चिड़िया
अगर काफल की बात हो और उस चिड़िया के बारे में न बताएं ऐसा कैसे हो सकता है. इस चिड़िया का नाम है कुक्कू. जो काफल पकने के बाद सुबह-सुबह सुरीली तान में कहती है काफल पाको मैं नि चाखो.kafal pako bird वैसे हमने तो इसकी सुरीली आवाज सुनी है. अगर आपने भी इसकी आवाज सुनी है तो कमेंट बॉक्स में बताना न भूलें.

बीमारियों की अचूक दवा है काफल
इस कहानी के बाद आते हैं काफल के गुणों पर. ये फल एक नहीं बल्कि 10 से अधिक बीमारियों की अचूक दवा है. ये फल गर्मियों के मौसम में उत्तरी भारत के पर्वतीय क्षेत्र के हिमालय के तलहटी क्षेत्र में पाए जाते हैं और खट्टे-मीठे होते हैं. काफल आयरन और विटामिन से भरपूर फल है और इसके जूस का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है. इससे एसिडिटी, गैस, कब्ज आदि की समस्या से भी राहत मिलती है. benefits of kafalअगर इसका सेवन प्रतिदिन किया जाए तो ये कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी लड़ जाता है और जिन्हें एनीमिया, अस्थमा, जुखाम, बुखार, अतिसार, बुखार आदि की परेशानी रहती है उनके लिए तो काफल बहुत ही लाभकारी फल है. काफल एक ऐसा फल भी है जिसके सेवन से तनाव कोसों दूर रहता है और डिप्रेशन जड़ से खत्म हो जाता है. शहरी का तो पता नहीं लेकिन हर पहाड़ी की पहली पसंद काफल होती है और इसके लिए पूरे साल इंतजार किया जाता है.

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