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शिव नाडर का जन्म 14 जुलाई 1945 को तमिलनाडु के एक गांव में हुआ, उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, उनकी शुरुआती शिक्षा तमिलनाडु के कई स्कूलों में हुई।

अगर आप अपनी महत्वाकांक्षा को लेकर शांति से काम कर रहे हैं, तो आप अपने मकसद को लेकर आत्मविश्वास से भर जाओगे, ये विचार हैं एचसीएल टेक्नोलॉजीज के फाउंडर शिव नाडर के, आज हम आपको उनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में बताते हैं।

गांव में जन्म
शिव नाडर का जन्म 14 जुलाई 1945 को तमिलनाडु के एक गांव में हुआ, उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, उनकी शुरुआती शिक्षा तमिलनाडु के कई स्कूलों में हुई, प्री यूनिवर्सिटी डिग्री करने के लिये वो अमेरिकन कॉलेज मदुरई गये, इसके बाद उन्होने कोयंबटूर से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से ली। इंडिया टाइम्स के अनुसार 1967 में उन्होने वालचंद ग्रुप कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे से अपने करियर की शुरुआत की, बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वो 10-12 घंटे की नौकरी करने के लिये नहीं बने हैं, वो कुछ अपना करना चाहते थे, 1975 में उन्होने माइक्रोकॉम्प लिमिटेड नाम से एक वेंचर शुरु किया, इसमें उनके कुछ दोस्तों ने उनका साथ दिया, सबसे पहले उनकी ये कंपनी भारतीय बाजार में टेलीडिजीटल कैलकुलेटर बेचती थी।

फिर आये कंप्यूटर बिजनेस में
जैसा कि वो कहते है कि बिजनेसमैन किसी भी अवसर को हाथ से जाने नहीं देते, वैसे ही शिव नाडर ने किया, 1976 में उन्हें इस बात का एहसास हुआ, कि भारत में कंप्यूटर्स नहीं है, वहीं आईबीएम किसी राजनीतिक मामले की वजह से देश छोड़कर जा रही थी, सबसे पहले उन्होने 18,700 करोड़ रुपये एचसीएल टेक्नोलॉजीज में निवेश किये। 1978 में एचसीएल ने अपना पहला कंप्यूटर बनाया, ये कंप्यूटर उन्होने आईबीएम और एप्पल से भी पहले बनाया, इसका नाम एचसीएल 8सी था, जिसमें रॉकवेल पीपी8 माइक्रो प्रोसेसर था, इससे पहले भारत में आईबीएम 1401 इस्तेमाल किया जाता था। आईबीएम अपने कंप्यूटर के 5 लाख रुपये प्रति साल चार्ज करता था, वहीं एचसीएल इस काम के 3 लाख रुपये प्रति साल चार्ज करने लगा।

विदेशों में भी स्थापित किया बिजनेस
1979 में उन्होने अपना बिजनेस विदेशों में फैलाना शुरु किया, सिंगापुर को आईटी सर्विसेज मुहैया करवाने लगे, वहां उन्होने फास्ट ईस्ट कंप्यूटर्स के नाम से एक सेटअप सेट किया, पहली बार एचसीओल ने उस टाइम 3 करोड़ का बिजनेस किया, इस नये वेंचर ने हर साल 10 लाख रुपये सेल में बढोतरी भी की। इस दौरान शिव नाडर ने नोट किया, कि भारत में आईटी सेक्टर में नौकरी करने के लिये युवाओं को ट्रेनिंग की जरुरत है, उन्होने चेन्नई में एसएसएन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग खुलवाया, ये कॉलेज उन्होने पिता की याद में खुलवाया, 2006 में उन्होने युवाओं को विदेश में पढने के लिये कई तरह के रिसर्च टाइअप्स भी किये, उन्होने यूपी के दो गांवों में भी स्कूल खुलवाये, यहां उन्होने बच्चों के लिये कंप्यूटर्स भी उपलब्ध करवाये।

बेटी को दिया आगे बढने का मौका
जुलाई 2020 में शिव नाडर ने अपनी बेटी रोशनी नाडर मल्होत्रा को कंपनी का चेयरमैन बना दिया, पहली बार कोई आईटी कंपनी को महिला ने लीड किया, वो पहले एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ थीं, 2019 में आई फोर्ब्स की मोस्ट पावरफुल वूमेन लिस्ट में वो 54वें स्थान पर थीं। आईटी इंडस्ट्री में अपना सहयोग देने के लिये 2008 में उन्हें पद्म भूषण अवॉर्ड मिला।

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