मोदी सरकार के फैसलों से ताकतवर चीन में मचा तहलका, तीन झटके और पस्त हो गया सुपरपावर!

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पिछले तीस दिनों में भारत ने चीन को सीधे प्रभावित करने वाले कई कदम उठाये हैं, सबसे पहले भारत ने विदेशी निवेश यानी एफडीआई के नियमों में बदलाव कर बड़ा फैसला लिया है।

कोविड-19 ने दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बुरी तरह से प्रभावित किया है, एक ओर सुपरपावर अमेरिका लगातार चीन से अपने सभी संबंधों को खत्म करने की बात कह रहा है, तो दूसरी ओर यूरोप के देश चीन के खिलाफ कोरोना जांच कराने की मांग कर रहे हैं, चीन पर सवाल सिर्फ यूरोप या अमेरिका से ही नहीं उठ रहे हैं, बल्कि भारत सरकार ने भी उनके खिलाफ कई कदम उठाये हैं।

एफडीआई के नियमों में सख्ती
पिछले तीस दिनों में भारत ने चीन को सीधे प्रभावित करने वाले कई कदम उठाये हैं, सबसे पहले भारत ने विदेशी निवेश यानी एफडीआई के नियमों में बदलाव कर बड़ा फैसला लिया है, अप्रैल महीने में भारत ने चीन से होने वाले निवेश के ऑटोमेटिक रुट को बंद कर दिया था, चीनी निवेश के पहले भारत सरकार की मंजूरी अनिवार्य कर दी, भारत को आशंका थी कि कोरोना महामारी में भारतीय कंपनियों का कारोबार ठप्प पड़ा है, जिसका फायदा उठाकर चीनी कंपनियां इनका सस्ते में टेकओवर कर सकती है।

चीन ने जताई नाराजगी
मोदी सरकार के इस फैसले के बाद चीन ने तुरंत रिएक्ट किया, चीन ने भारत के इस कदम को एकतरफा और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ बताकर नाराजगी जताई, यहां तक कि चीनी मीडिया ने भारत को मेडिकल सप्लाई भी बंद करने की धमकी दे दी थी, चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था, भारत मेडिकल सप्लाई के लिये काफी हद तक चीन पर निर्भर है, भारत सरकार के कथित अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने की कोशिश इस संकट की घड़ी में भारत के लिये सप्लाई के रास्ते में ही मुश्किल खड़ी करेगी।

भारत का मैन्युफैक्चरिंग में चुनौती देना
कोरोना काल के बीच चीन से कई कंपनियां अपना कारोबार समेटकर भारत आना चाहती है, इसे लेकर भी चीन बेहद परेशान है। भारत के वर्ल्ड फैक्ट्री बनने की रिपोर्ट्स पर चीनी मीडिया ने कहा था कि भारत चीन की जगह लेने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वो इसमें कभी कामयाब नहीं होगा, चीन ने ये चिंता उस समय जताई है, जब पिछले दिनों जर्मनी की एक जूता कंपनी ने अपनी मैन्युफैक्टरिंग यूनिट चीन से यूपी में शिफ्ट करने की बात कही।

कोरोना जांच को समर्थन
भारत ने पिछले सप्ताह ही चीन के खिलाफ एक और बड़ा कदम उठाया, कोरोना महामारी के संबंध में सबसे पहले केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है, ये किसी लैब में पैदा हुआ है, इसके बाद भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की बैठक में कोरोना वायरस की उत्पत्ति के लिये स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच का भी समर्थन किया।