Tarkeshwar 1

जवान को छुड़ाने के लिये ऐसे लोगों की जरुरत थी, जो सरकार और माओवादियों के लिये भरोसेमंद हो, इसमें दंतेवाड़ा के रिटायर्ड शिक्षक जय रुद्र करे को शामिल किया गया।

सुकमा-बीजापुर सीमा पर हुए मुठभेड़ के बाद नक्सलियों द्वारा किडनैप किये गये कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह को आखिरकार छुड़ा लिया गया, जंगल से उन्हें लेने के लिये 4 लोगों की टीम गई थी, जिसमें कुछ स्थानीय पत्रकार भी शामिल थे, बस्तर के गांधी कहे जाने वाले धर्मपाल सैनी, गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बौरैय्या, रिटायर्ड शिक्षक जयरुद्र करे और मुरतुंडा की पूर्व सरपंच सुखमती हपका ने जवान की रिहाई में अहम भूमिका निभाई।

नक्सलियों से संवाद
इनके साथ ही पत्रकार गणेश मिश्रा और मुकेश चंद्राकर भी लगातार कोशिश में लगे थे, इन पत्रकारों ने नक्सलियों के साथ संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, राकेश्वर सिंह की तस्वीर भी नक्सलियों ने इन्हीं के पास भेजी थी, और अपना संदेश दिया था, नक्सलियों ने कहा था कि सरकार वार्ताकारों की घोषणा करे, तभी जवान को छोड़ा जाएगा, फिर मध्यस्थता के लिये 4 लोगों का चयन किया गया, कई और पत्रकार भी जवान की रिहाई के लिये नक्सलियों के टच में थे।

जन अदालत
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकार चंद्राकर से नक्सलियों ने कहा, कि वो जगरगोंडा के जंगल में पहुंचे, जहां पर एनकाउंटर हुआ था, वार्ताकारों के साथ कुछ पत्रकार भी घने जंगल में पहुंचे, यहां 20 गांव के हजारों लोगों को इकट्ठा कर जन अदालत चल रही थी, इस बीच राकेश्वर को रस्सी से बांधकर लाया गया, वहां मौजूद लोगों से पूछा गया कि क्या उन्हें छोड़ देना चाहिये, लोगों ने जब हामी भरी, तो उनकी रस्सियां खोली गई। राकेश्वर ने बताया कि हमले के दौरान वो बेहोश हो गये थे, तभी नक्सली उन्हें उठा ले गये, इसके बाद 6 दिनों तक उन्हें अलग-अलग गांव में घुमाया गया, हालांकि कोई बुरा सलूक नहीं किया गया, खाने-पीने और सोने की उचित व्यवस्था की गई, जहां उन्हें ले जाया गया, वो इलाका 15 किमी के अंदर ही था, जवान को छुड़ाने गये पत्रकार ने बताया कि जन अदालत के दौरान काफी देर तक नक्सली भाषण देते रहे, उसके बाद ही उन्हें छोड़ा गया, चारों मध्यस्थ जवान के साथ तर्रेम के रास्ते बासागुड़ा थाने पहुंचे। जवान के सही-सलामत छूटने के बाद उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई, पिछले कई दिनो से उनका परिवार रिहाई का इंतजार कर रहा था, और लगातार सरकार से अपनी अर्जी लगा रहा था, उनकी पत्नी ने सरकार को शुक्रिया अदा किया है।

कौन है जवान की रिहाई के हीरो
जवान को छुड़ाने के लिये ऐसे लोगों की जरुरत थी, जो सरकार और माओवादियों के लिये भरोसेमंद हो, इसमें दंतेवाड़ा के रिटायर्ड शिक्षक जय रुद्र करे को शामिल किया गया, वो रिटायरमेंट के बाद धर्मपाल सैनी के साथ काम कर रहे हैं, पद्म श्री धर्मपाल सैनी सालों से बस्तर के आदिवासियों के लिये काम कर रहे हैं, उन्हें बस्तर का गांधी कहा जाता है, इसके अलावा तैलम बौरैया भी पूर्व शिक्षक हैं, और गोंडवाना समाज के अध्यक्ष हैं, इस ग्रुप में सुखमती हपका को भी शामिल किया गया, जो सामाजिक कार्यकर्ता है, और गोंडवाना समाज की उपाध्यक्ष है।

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