प्रेम कहानी- दूसरे धर्म की लड़की के प्यार में पागल थे पप्पू यादव, ठुकराने पर खा ली थी नींद की गोलियां!

0
661
Pappu yadav 2

पप्पू यादव का नाता जमींदार परिवार से है, उन्होने कम उम्र में ही राजनीति में अपनी पहचान बनाई, खैर आज हम आपको उनकी प्रेम कहानी के बारे में बताते हैं।

बिहार चुनाव में इस बार कई दिग्गज अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, कुछ लोग बड़ी पार्टियों के टिकट पर ताल ठोंक रहे हैं, तो कुछ खुद की पार्टी से बिहार के सिंहासन तक पहुंचना चाह रहे हैं, ऐसे ही एक शख्स बिहार के पूर्व बाहुबली सांसद रहे पप्पू यादव हैं, जिन्होने कोरोना लॉकडाउन के दौरान आम जनों की बेहद मदद की, इस बार वो अपनी जन अधिकार पार्टी के साथ चुनावी मैदान में हैं, वो सीएम उम्मीदवार भी हैं, ऐसे में आज हम आपको पप्पू यादव के निजी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं, जो राजनीति की तरह ही कम उतार-चढाव वाली रही है।

जमींदार परिवार से नाता
पप्पू यादव का नाता जमींदार परिवार से है, उन्होने कम उम्र में ही राजनीति में अपनी पहचान बनाई, खैर आज हम आपको उनकी प्रेम कहानी के बारे में बताते हैं। साल 1991 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत पटना के बांकीपुर जेल में पप्पू यादव बंद थे, एक अखबार से बातचीत में उन्होने बया कि रंजीत जी को मैं जितना शुक्रिया अदा करुं वो कम है, 3 साल तक हमारी दोस्ती चली, उन्होने मेरे प्यार को समझा, तमाम संघर्षों में भी मेरे साथ थी, हमारा प्रेम प्रसंग फरवरी 1992 में शुरु हुआ, और इसके बाद 1994 में मेरी शादी हुई, वो दौर बेहद संघर्ष से भरा था, उस समय एक-दूसरे से मिलना जुलना भी मुश्किल था, पटना आना-जाना तो बहुत बड़ी बात थी, मैं खुशनसीब हूं कि मुझे बहुत अच्छी पत्नी मिली।

आसान नहीं थी प्यार की जंग
पप्पू यादव को रंजीत रंजन का दिल जीतने के लिये काफी पापड़ बेलने पड़े, आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन रंजीत ने पहली बार में पप्पू के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, हालांकि पप्पू ने हार नहीं मानी, उन्होने रंजीत से इतना तक कह दिया कि उनके जिंदगी की पहली और आखिरी लड़की वही हैं। पटना के बांकीपुर जेल में पप्पू यादव बंद थी, उस दौरान वो अकसर जेल सुपरिटेडेंट के आवास से लगे मैदान में लड़कों को खेलते देखा करते थे, इन्हीं लड़कों में रंजीत के छोटे भाई विक्की भी थे, धीरे-धीरे खेलते वाले लड़कों के साथ पप्पू यादव की नजदीकी विक्की से बढ गई, इसी क्रम में एक बार पप्पू ने विक्की के फैमिली एलबम में टेनिस खेलते हुए उनकी बहन रंजीत की तस्वीर देखी, पहली नजर में ही दिल हार बैठे, जेल से छूटने के बाद रंजीत से मिलने के लिये पप्पू यादव अकसर उस टेनिस क्लब में पहुंच जाते, जहां रंजीत खेलती थी, पप्पू की ये आदतें उन्हें अच्छी नहीं लगती थी, उन्होने कई बार मना किया, मिलने से रोका, कठोर शब्द भी कहे, लेकिन पप्पू डटे रहे, एक बार तो रंजीत ने यहां तक कह दिया, कि वो सिख हैं और पप्पू हिंदू, उनके घर वाले ऐसा नहीं होने देंगे।

हताश होकर खा ली थी नींद की गोलियां
रंजीत के रुखे व्यवहार से हताश पप्पू यादव ने ढेर सारी नींद की गोलियां खा ली थी, जिसके बाद उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया, इस बारे में उन्होने अपनी किताब द्रोहकाल का पथिक में भी विस्तार से चर्चा किया है, इस घटना के बाद से ही रंजीत का व्यवहार बदलने लगा, लेकिन दोनों की राहें अभी भी आसान नहीं थी, पप्पू के परिवार से इस शादी के लिये कोई समस्या नहीं थी, लेकिन रंजीत के पिता ग्रंथी थे, शुरु से ही वो इस रिश्ते के खिलाफ थे, ऐसे में पप्पू के बहन-बहनोई रंजीत के परिवार को मनाने चंडीगढ गये, फिर भी बात नहीं बनी, तमाम कोशिशों के बावजूद हर बार हताशा मिली, जिससे पप्पू यादव निराश हो गये। फिर किसी ने उन्हें सलाह दी कि कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया आपकी मदद कर सकते हैं, पप्पू तुरंत उनसे मिलने दिल्ली जा पहुंचे, जिसके बाद अहलूवालिया ने रंजीत के परिवार को मनाने में बड़ी भूमिका निभाई, आखिरकार फरवरी 1994 में दोनों की शादी हुई।

Read Also – आजतक का ओपिनियन पोल, नीतीश से लोग नाराज, जानिये एनडीए को मिलेगी कितने सीटें?