Wednesday, May 12, 2021

बिहार में खत्म हो जाएगा शराबबंदी कानून? विधायक के पत्र से नई चर्चा शुरु!

कांग्रेस के अनुसार शराब दुकानों में ही नहीं बल्कि घर-घर तक पहुंचती है, शराबबंदी कानून लागू होने के बाद भी शराब की होम डिलीवरी हो रही है।

बिहार चुनाव के दौरान शराबबंदी का मुद्दा भी छाया रहा, हालांकि एक-दो सभाओं को छोड़कर नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को ज्यादा उछाला नहीं, लेकिन नई सरकार गठन के बाद अब फिर से शराब बिक्री का मामला जोर पकड़ने लगा है, मंगलवार को बिहार कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने एक साथ बिहार में शराब बेचने की मांग कर दी है, कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा की मांग को राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने भी समर्थन किया है।

मांग का समर्थन
अखिलेश सिंह ने अपनी पार्टी के विधायक दल के नेता अजित शर्मा की मांग का समर्थन किया है, दरअसल कांग्रेस विधायक ने सीएम नीतीश कुमार को लेटर लिखकर बिहार में शराबबंदी कानून खत्म करने की मांग की है, जिस पर अखिलेश सिंह ने सवालिया लहजे में कहा कि आज बिहार में कहां शराब नहीं बिक रहा है, शराबबंदी की वजह से सरकार को राजस्व की क्षति हो रही है, अजित शर्मा ने इस परिपेक्ष्य में शराबबंदी कानून को खत्म करने की मांग रखी है।

भागलपुर विधायक ने उठाई थी मांग
इससे पहले भागलपुर कांग्रेस विधायक अजित शर्मा ने सुशासन बाबू को लेटर लिखकर इस कानून को खत्म करने की मांग की थी, उन्होने कहा था कि शराबबंदी कानून की समीक्षा करने का समय आ गया है, लेटर में लिखा गया है कि बिहार में 2016 में शराबबंदी कानून लागू किया गया, तब कांग्रेस पार्टी भी सरकार के साथ थी, तब पार्टी ने अच्छा काम समझकर आपका भरपूर साथ दिया था, लेकिन साढे 4 सालों में देखने को मिला, कि शराबबंदी सिर्फ कहने को है, हकीकत में ये बिहार में लागू ही नहीं है, बल्कि ये अवैध धन अर्जन का साधन हो गया है।

होम डिलीवरी में लगे हैं बच्चे
कांग्रेस के अनुसार शराब दुकानों में ही नहीं बल्कि घर-घर तक पहुंचती है, शराबबंदी कानून लागू होने के बाद भी शराब की होम डिलीवरी हो रही है, इस धंधे में ना सिर्फ शराब माफिया बल्कि पुलिस-प्रशासन, नौकरशाह तथा कुछ राजनीतिज्ञ भी शामिल हैं, इस धंधे में नई उम्र के लड़के-लड़कियां भी पढाई छोड़कर होम डिलीवरी में लग गये हैं। विधायक ने लेटर में लिखा है, कि जिस उम्मीद के साथ शराबबंदी लागू की गई थी, वो सफल होता नहीं दिख रहा है, इस कानून से अब गरीब परिवार और भी आर्थिक बोझ तले दब गया है, क्योंकि अब 2-3 गुना ज्यादा कीमत पर शराब खरीदकर लोग पी रहे हैं, इतना ही नहीं लाइसेंसी दुकानों में शराब नहीं मिलने की वजह से नकली-जहरीली शराब की होम डिलीवरी हो रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य का भी नुकसान हो रहा है।

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