एक लव स्टोरी, जिसने पूरे बिहार को हिला कर रख दिया था, गिरफ्तार हुए थे लालू-पासवान

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Prashant

मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के अड़ेर गांव में किसान परिवार का लड़का जिसका नाम था प्रशांत था, इंडियन पब्लिक स्कूल में पढाई करता था, पढाई के दौरान ही उसे प्रीति से प्यार हो गया।

ये कहानी है एक नाकाम इश्क की, जिसने बिहार के मधुबनी जिले को हिलाकर रख दिया, इस नाकाम इश्क की कहानी का नायक था 17 साल का एक लड़का, और नायिका थी उसी की हमउम्र, मामले में विलेन के रुप में सामने आया पूरे बिहार का पुलिस-प्रशासन, इतना बड़ा विलेन की 3 लोगों की हत्या हो गई, बिहार के 21 दुर्दांत कैदी फरार हो गये जिनमें एक पाकिस्तान का भी था, सैकड़ों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था, पूरा शहर धू-धू कर जलता रहा, लोग अपनी सियासी रोटियां सेकते रहे, आज हम आपको बता रहे हैं कि 8 साल पहले बिहार में क्या हुआ था।

किसान का बेटा और अधिकारी की बेटी
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के अड़ेर गांव में किसान परिवार का लड़का जिसका नाम था प्रशांत था, इंडियन पब्लिक स्कूल में पढाई करता था, पढाई के दौरान ही उसे प्रीति से प्यार हो गया, प्रीति के पापा मधुबनी जिले के डीपीओ थे, नाम था जगतपति चौधरी, लड़का किसान परिवार का और बेटी अधिकारी की, हैसियत में बड़ा अंतर, लेकिन प्यार कहां हैसियत देखता, नतीजा घर वालों के विरोध के बाद दोनों घर से भाग गये, वो तारीख थी 4 सितंबर 2012, इसके बाद प्रशांत के घर वाले थाने पहुंचे, कहा बेटे के किडनैपिंग का केस दर्ज करो, लेकिन पुलिस वालों ने समझा-बुझाकर वापस भेज दिया, मामला एसपी के पास पहुंचा, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला, एक हफ्ते बाद 11 सितंबर को प्रीति के घर वाले थाने पहुंचे, अपहरण का केस दर्ज करो, अब चूंकि लड़की के पिता डीपीओ थे, तो केस भी दर्ज हो गया। जिसमें प्रशांत के पिता, दादा और चचेरे भाई को हिरासत में लिया गया, पोते के बारे में जानकारी हासिल करने के लिये बूढे दादा से मारपीट भी की गई, स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, तो दबाव में आकर पुलिस ने बूढे दादा को छोड़ दिया।

पुलिस को मिली सिरकटी लाश
3 अक्टूबर 2012 को ककना पुल के पास पुलिस को एक सिरकटी लाश मिली, 2 दिन बार प्रशांत की मां विनीता देवी और दूसरे घर वालों ने कहा कि ये लाश प्रशांत की है, प्रीति के पिता ने उनके बेटे की हत्या करवा दी, बकायदा मां ने बेटे के पैर के निशान और कपड़े से लाश की शिनाख्त की, मां ने कहा कि जो पैंट शर्ट और मोजा पहनकर बेटा घर से निकला था, वही कपड़े लाश के पास भी है, लेकिन जब लाश का पोस्टमॉर्टम हुआ तो पता चला कि वो प्रशांत से उम्र में करीब दस साल बड़ा है, इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस प्रशांत के घर वालों को वो लाश देने से मना कर रही थी, लेकिन लोगों के बीच संदेश ये जा रहा था कि डीपीओ के दबाव में पुलिस ने रिपोर्ट बदल दी है, 11 अक्टूबर को प्रशांत के घर वाले मधुबनी के डीएम ऑफिस के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गये, लेकिन उनसे मिलने कोई पुलिस अधिकारी नहीं आया, उस दिन शाम होते-होते ये खबर फैल गई कि जगतपति चौधरी के दवाब में पुलिस प्रशांत के घर वालों की नहीं सुन रही, जिसके बाद 12 अक्टूबर को दोपहर होते-होते सैकड़ों लोग प्रशांत के घर वालों के साथ धरने पर बैठ गये।

लोगों पर लाठीचार्ज
जब पुलिस-प्रशासन ने सैकड़ों लोगों को प्रशांत के घर वालों के समर्थन में उतरे देखा, तो भीड़ हटाने के लिये लाठीचार्ज कर दिया, लोगों ने भी इसका विरोध किया, पुलिस की लाठी से प्रशांत की दादी, मां और दादा गंभीर रुप से घायल हो गये, पुलसिया बर्बरता से नाराज भीड़ टाउन ताने पहुंचे गई और आगजनी कर दी, जब मधुबनी जिले का माहौल बिगड़ने लगा, तो वहां जेल में बंद कई खूंखार कैदियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाने लगे, लेकिन भीड़ के कैदियों की गाड़ी पर भी हमला बोल दिया, मौके का फायदा उठाकर 20 से ज्यादा कैदी भाग गये, जिसमें एक पाकिस्तानी कैदी भी शामिल था, जब बवाल ज्यादा बढ गया, तो पुलिस ने हवाई फायरिंग की, करीब 100 राउंड गोलियां चली, जिसमें तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोगों को गोली लगी, और घायल हो गये, जिले का माहौल और खराब हो गया, 12 अक्टूबर की शाम होते-होते सीएम नीतीश कुमार के आदेश पर डीएम तथा एसपी के साथ ही डीआईजी रेंज का भी तबादला हो गया, लेकिन हालात काबू में नहीं आये, सीएम नीतीश कुमार ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये, लेकिन 13 अक्टूबर की शाम तक मधुबनी जलता ही रहा।

लालू-पासवान को देनी पड़ी गिरफ्तारी
जब हंगामा नहीं थमा तो पुलिस ने तय किया, कि सिरकटी लाश प्रशांत के घर वालों को सौंप दी जाए, लाश घर वालों को दे दी गई, घर वालों ने दाह संस्कार कर दिया, गांव के लोगों ने बाल भी मुंडवा लिये, फिर 15 अक्टूबर को इस मामले को लेकर वाम दलों ने बिहार बंद बुलाया था, इस बंद को विपक्षी दल राजद के साथ ही लोजपा ने भी समर्थन किया, खुद लालू और रामविलास पासवान नारेबाजी करते हुए सड़कों पर उतरे, पुलिस ने लालू और पासवान को गिरफ्तार किया।

पूरा मामला पलट गया
हंगामा चल रही थी, तत्कालीन डीजीपी अभयानंद ने एक प्रेस कांफ्रेंस में खुलासा किया, कि जिस प्रशांत की हत्या की बात हो रही है, वो जिंदा है, इतना ही नहीं प्रीति भी जिंदा है, दोनों एक साथ दिल्ली में हैं, डीजीपी के मुताबिक दिल्ली के महरौली में रहने वाले एमएन झा ने दोनों को एक साथ देख 100 नंबर पर फोन किया था, उन दोनों ने पुलिस को बताया कि घर वालों के विरोध को देखते हुए 7 सितंबर को दोनों मधुबनी से भागे थे, वहां से रांची, जम्मू और दार्जिलिंग गये, जब पैसे खत्म होने लगे, तो दिल्ली पहुंच गये और वहीं रहने लगे।

इस तरह खत्म हुई प्रेम कहानी
जब पुलिस ने लोगों को बताया कि दोनं जिंदा है, तो हंगामा शांत हुआ, पुलिस ने दोनों को उनके घर वालों को सौंप दिया, लड़की के घर वालों ने लड़की की शादी कहीं और कर दी, जबकि लड़का अभी तक कुंवारा है, वो मधुबनी में ही पढाई कर रहा है, केस लड़के और उसके घरवालों पर दर्ज हुआ था, जो अभी भी चल रहा है।

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