आसान भाषा में फटाफट जानिये- ये उदासी नहीं डिप्रेशन है, क्या है लक्षण? इसे इग्नोर ना करें

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सबसे जरुरी प्वाइंट- यदि आपको खुदकुशी के ख्याल आने लगे हैं, और बार-बार आने लगे हों, तो इसे गंभीरता से लें, और अपने आस-पास के लोगों से बात करें, इस पर उनसे मदद मांगे। कोई भी बात छुपाये नहीं, डॉक्टरी परामर्श लें।

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या ने एक बार फिर से कई सवालों को एक साथ सामने लाकर रख दिया है, मौत भले एक सच हो, लेकिन इसे खुद ब खुद गले लगाना और समय से पहले चले जाना हर बार चौंकाता है, जैसे-जैसे विकास और भौतिकवाद बढ रहा है, वैसे-वैसे आत्महत्या के केस भी बढ रहे हैं, आत्महत्या और डिप्रेशन को लेकर डॉक्टरी राय क्या है, आज हम इस नजरिये से समझने की कोशिश करते हैं। एक निजी चैनल ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल की क्लीनिकल साइकॉलोजिस्ट डॉ. प्रेरणा शर्मा से इस मुद्दे पर बातचीत की है।

कुछ लक्षण, जो आपको अपने भीतर झांकने में मदद करेंगे
होपलेसनेस- किसी भी प्रकार की नाउम्मीदी कि अब कुछ ठीक नहीं हो सकता
वर्थलेसनेस- खुद को लेकर ये विचार आना और बार-बार आना, कि मैं किसी के काबिल नहीं या मैं फलां चीज हैंडल नहीं कर पा रहा।
हेल्पलेसनेस- यानी किसी मामले विशेष को लेकर मदद कर सकने में खुद को असमर्थ पाना

खुद के काम करने के पैटर्न में बदलाव, जिन चीजों या कामों को करने में पहले आनंद आता है, अब उनमें मजा नहीं आता, रुचियों में इंट्रेस्ट खत्म होने लगा हो।
मूड बार-बार छोटी-छोटी चीजों को लेकर खराब होता हो, यानी इसे आसान भाषा में समझें, कि छोटी-छोटी बातों पर मन उदास हो जाता हो, चिड़चिड़ापन बढता हो।
गिल्ट यानी आत्मग्लानी, अतीत में हुई किसी गलती या भूल को सीने से लगाये रखना और खुद को दोषी मानना।
डिप्रेशन की वजह से कुछ लोग हीन भावना का भी शिकार हो जाते हैं।
सेल्फ एस्टीम या आत्मविश्वास का कम होना, यानी ऐसा सोचना या मानने लगना कि मैं किसी के काबिल नहीं हूं।
ज्यादा सोने लगे हैं, या बेहद कम नींद ले रहे हैं, या फिर असहज करने वाले विचारों की वजह से आप रात में जग जाते हैं और फिर नींद नहीं आती।
भूख के पैटर्न में बदलाव यानी खाने-पीने का मन ना करता हो, या फिर अचानक बहुत ज्यादा भोजन करने लगे हों।
यदि आप पहले काफी सोशल रहा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे लोगों से मिलना-जुलना अच्छा ना लगता हो, खुद को समेटने लगे हों।
सबसे जरुरी प्वाइंट- यदि आपको खुदकुशी के ख्याल आने लगे हैं, और बार-बार आने लगे हों, तो इसे गंभीरता से लें, और अपने आस-पास के लोगों से बात करें, इस पर उनसे मदद मांगे। कोई भी बात छुपाये नहीं, डॉक्टरी परामर्श लें।

डिप्रेशन किसे हो सकता है
डॉ. प्रेरणा ने बताया कि ये सोचना कि डिप्रेशन हमें नहीं होगा, ये गलत है ये रोग किसी को भी हो सकता है, ये रोग जीवन में कभी भी आपको अपनी चपेट में ले सकता है, इसलिये किसी के बाहरी आउटलुक को देख ये अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि डिप्रेशन होगा या नहीं, जैसा कि लोग सुशांत के केस में समझ और कह रहे हैं।

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