पिता की पिटाई के डर से घर से भागकर मुंबई पहुंचे थे रवि किशन, और बन गये स्टार, फिल्मी है कहानी!

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ravi kishan father

साल 1991 में रवि किशन को फिल्म पीतांबर में काम करने का मौका मिला, ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर सकी।

रवि किशन भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ बॉलीवुड में भी पहचान बना चुके हैं, पिछले साल गोरखपुर सीट से पहली बार जीतकर लोकसभा पहुंचे भोजपुरी सुपरस्टार वहां भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं, वो वहां खुलकर सवाल उठाते हैं, ड्रग्स मामले पर सवाल उठाने के बाद रवि सुर्खियों में हैं, तो आइये हम आपको उनकी निजी जिंदगी से रुबरू कराते हैं।

जौनपुर में जन्म
रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1971 को जौनपुर जिले के बिसुई गांव में हुआ था, उनका पूरा नाम रवि किशन शुक्ला है, वो एक साधारण ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं, उन्होने अपनी शुरुआती पढाई गांव में ही पूरी की है, उनके परिवार की इतनी भी इनकम नहीं थी कि वो अच्छे से गुजारा कर सके, रवि ने खुद ही एक इंटरव्यू में बताया था कि मेरा पिताजी पंडिताई का काम करते थे, साथ ही वो डेयरी भी चलाते थे हालांकि बाद में वो किसी कारण से बंद हो गया था।

1990 में गांव छोड़कर मुंबई आ गये
भोजपुरी स्टार ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें बचपन से ही एक्टिंग का शौक था, वो गांव की रामलीला में सीता का किरदार करते थे, हालांकि उनके पिता जी को ये बिल्कुल पसंद नहीं था, इस लिये पिताजी ने एक बार बेल्ट से उनकी भरपूर पिटाई की, वो कहते थे नचनिया बनिहे, जिसके बाद मां ने उन्हें 500 रुपये देकर कहा कि जान बचाकर घर से भाग जाओ, नहीं तो बाबू जी मार देंगे, रवि साल 1990 में गांव छोड़कर मुंबई चले आये, हालांकि उनके सामने सबसे बड़ा संकट जीवन यापन का था, क्योंकि काम था नहीं और गुजारा करना भी मुश्किल था, कई बार तो उन्हें भूखे पेट भी सोना पड़ता था।

सिनेमा में पहचान
साल 1991 में रवि किशन को फिल्म पीतांबर में काम करने का मौका मिला, ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर सकी, इसके बाद उन्हें 1996 में शाहरुख खान की फिल्म आर्मी में छोटा सा रोल मिला, इसके बाद उनकी गाड़ी धीरे-धीरे चल निकली, भोजपुरी फिल्मों से ऑफर मिलने लगे, रवि किशन को पहचान 2003 में रिलीज सलमान खान की फिल्म तेरे नाम से मिली, इसके बाद उन्होने पीछे पलटकर नहीं देखा।

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