Friday, April 23, 2021

असल कहानी गंगूबाई काठियावाड़ी- प्यार में मिला धोखा और शोषण, जिससे डरता था मुंबई माफिया!

गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास था, वो गुजरात का काठीवाड़ की रहने वाली थी, एक संपन्न परिवार में पैदा हुई गंगा का सपना था, कि वो बड़ी होकर एक्ट्रेस बने।

गंगूबाई काठियावाड़ी, ये नाम इन दिनों सुर्खियों में है, वजह है संजय लीला भंसाली की इसी नाम से बन रही फिल्म, जिसमें आलिया भट्ट मुख्य किरदार में हैं, बुधवार को फिल्म की टीजर रिलीज हुआ, जिसमें आलिया का धमक भरा अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है, फिल्म की कहानी मुंबई माफिया की क्वीन कही जाने वाली गंगूबाई कोठेवाली की असल कहानी पर आधारित है, उसे लोग गंगूबाई काठियावाड़ी भी बुलाते थे, मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया में गंगूबाई ऐसा नाम रहा, जिसके कोठे पर बिना उसकी मर्जी के बड़े-बड़े गैंगस्टर भी कदम नहीं रखते थे, वो सेक्सवर्करों के हित के लिये काम करती थी, गंगूबाई के कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि आजाद मैदान में उसके भाषण को 60 के दशक में हर बड़े अखबार ने जगह दी थी।

प्यार में धोखा और शोषण की दर्दनाक कहानी
भंसाली की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी चर्चित लेखक और पत्रकार एस हुसैन जैदी की किताब माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई पर आधारित है, एक पुरानी कहावत है कि कोई इंसान बुरा नहीं होता, उसे बुरा बनाते हैं हालात, गंगूबाई की भी कहानी कुछ ऐसी ही है, वो तो गंगा थी, लेकिन धोखे और शोषण ने उससे उसकी मासूमियत छीन ली, उसके भीतर गुबार भर दिया, देखते ही देखते गुजरात की गंगा हरजीवनदास कब गंगूबाई बन गई, कब वो मुंबई के सबसे नामचीन वेश्यालय की मालकिन हो गई, ये ना तो उसे पता चला और ना ही मुंबई माफिया को और ना ही पुलिस को।

गुजरात की रहने वाली
गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास था, वो गुजरात का काठीवाड़ की रहने वाली थी, एक संपन्न परिवार में पैदा हुई गंगा का सपना था, कि वो बड़ी होकर एक्ट्रेस बने, माता-पिता ने पालन-पोषण भी बड़े लाड़-प्यार से किया, लेकिन कॉलेज के दिनों में गंगा को प्यार हो गया, प्यार होना गलत नहीं था, लेकिन 16 साल की उम्र में उसे जिससे प्यार हुआ था, वो गलत था, शायद गंगा की जिंदगी की सबसे बड़ी भूल, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी, गंगा को अपने पिता के अकाउंटेंट से इश्क हुआ था, नाम था रमनिक लाल।

पति ने 500 में वेश्यालय को बेचा
गंगा के घर वाले इस रिश्ते के खिलाफ थे, गंगा को एक्ट्रेस भी बनना था और प्यार भी पाना था, इसलिये वो रमनिक के साथ घर से भागकर मुंबई आ गई, दोनों ने शादी कर ली, लेकिन इससे पहले कि गंगा मुंबई की चकाचौंध में खुद को संभाल पाती, दरिंदे पति ने उसे सिर्फ 500 रुपये में कमाठीपुरा के एक वेश्यालय को बेच दिया, वहां हर दिन गंगा को मैला किया जाता, हालात के आगे मजबूर गंगा रोज रोती बिलखती थी, खुद को और अपने प्यार को कोसती थी।

गुंडे ने किये रेप, करीम लाला ने बनाया बहन
60 के दशक में कमाठीपुरा के इलाके में माफिया डॉन करीम लाला का सिक्का चलता था, एक बार करीम लाला के गुंडे की नजर गंगा पर पड़ी, उस वहशी ने गंगा का रेप किया, गंगा इंसाफ मांगने करीम लाला के पास पहुंची, तो माफिया ने ना सिर्फ इंसाफ किया, बल्कि गंगा को अपनी मुंहबोली बहन मान लिया, इस एक घटना ने गंगा की जिंदगी बदल दी, यहां से गंगा से गंगूबाई काठियावाड़ी की असली कहानी शुरु हुई।

गंगूबाई बन बई गंगूमां
करीम लाला की बहन बनने के बाद गंगूबाई का कद बढ गया, वो कमाठीपुरा की कोठेवाली गंगूबाई बन गई, धीरे-धीरे कमाठीपुरा की पूरी कमाई गंगूबाई के हाथ में आ गई, कोठा चलाना काम था, लेकिन वो नेकदिल थी, इसलिये सेक्स वर्करों के लिये गंगूमां बन गई, कहा जाता है कि गंगूबाई ने अपने वेश्यालय में कभी किसी लड़की के साथ जबरदस्ती नहीं की थी, वो उसी को कोठे पर रखती, जो अपनी मर्जी से आती थी, गंगूबाई सेक्स वर्कस के अधिकारों के लिये एक आवाज बन गई।

बिना इजाजत गैंगस्टर भी नहीं रखते कदम
गंगूबाई की धमक ऐसी थी, कि उनकी बिना इजाजत कोई भी गैंगस्टर या बड़े से बड़ा माफिया कोठे या कमाठीपुरा में कदम नहीं रखता था, गंगूबाई ने अपने जीवन में ना सिर्फ सेक्स वर्कर्स के लिये काम किया, बल्कि वो अनाथ बच्चों की भी सहारा बनी, उन्होने कई बच्चों को गोद लिया था, ये बच्चे या तो अनाथ थे या बेघर, इन बच्चों की पढाई की जिम्मेदारी भी गंगूबाई की थी।

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