Tuesday, May 11, 2021

26/11 हमले के बाद अर्श से फर्श पर आ गया Yes Bank, ऐसे हुई आपसी कलह की शुरुआत!

कर्ज चुकाने के लिये प्रमोटर्स ने धीरे-धीरे बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचनी शुरु की, अक्टूबर 2019 में नौबत यहां तक आ गई कि राणा कपूर तक को अपने शेयर बेचने पड़े, और यस बैंक में उनके ग्रुप की हिस्सेदारी घटकर 4.72 रह गई।

साल 2008 में मुंबई में हुए 26/11 हमले में यस बैंक के सह संस्थापक अशोक कपूर की हत्या हो गई थी, जिसके बाद उनकी बेटी शगुन कपूर गोगिया ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद उन्हें बैंक के बोर्ड में शामिल किया गया, बैंक की गिरती हुई स्थिति को देखते हुए उनकी बेटी ने कहा था कि अगर उनके पापा मुंबई हमले के शिकार नहीं हुए होते, तो बैंक की कभी भी ये हालत नहीं होती, आज हम आपको बताते हैं कि कैसे ये बैंक कुछ ही सालों में अर्श से फर्श पर आ गया। जानिये पूरी कहानी

इस तरह बैंक की शुरुआत
राणा कपूर तथा अशोक कपूर ने 1998 में हालैंड के रोबो बैंक के साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी रोबो इंडिया फाइनेंस की स्थापना की, जिसमें इन दोनों के अलावा एक और पार्टनर हरकीरत सिंह की 25-25 फीसदी हिस्सेदारी थी, 2003 में तीनों ने रोबो इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेच दी, फिर राणा और अशोक ने 200 करोड़ की पूंजी से यस बैंक शुरु किया, दोनों को रोबो इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर 10-10 लाख डॉलर मिले थे, यस बैंक ने 2004 में अपनी पहली ब्रांच मुंबई में खोली थी, उस समय बैंकिग सेक्टर पर पूरी तरह सरकारी क्षेत्र के बैंकों का कब्जा था, सिर्फ एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक ही प्राइवेट सेक्टर के बैंक थे, लेकिन कुछ ही सालों में देखते ही देखते ये करीब 2 लाख करोड़ की पूंजी वाला बैंक बन गया।

2004 में बैंक शुरु
इसके बाद 2005 में इसका आईपीओ आया था 2005 में राणा कपूर को एंटरप्रेन्योर ऑफ द इयर और 2009 में बैंक को 30 हजार करोड़ रुपये की बैलेंस शीट के साथ सबसे तेज ग्रोथ का अवॉर्ड मिला, 2015 में यस बैंक एनएसई पर लिस्ट हुआ। 2017 में बैंक ने क्यूआईपी के जरिये 4906.68 करोड़ रुपये जुटाये, जो किसी प्राइवेट सेक्टर बैंक द्वारा जुटाई गई सबसे बड़ी राशि थी। बैंक के शुरुआत के चार साल बाद ही ये विवाद सामने आने लगा था, इसका असर बैंक के कारोबार पर भी देखने को मिला, इस बीच मुंबई हमले में अशोक कपूर की मौत के बाद मामले ने काफी बड़ा रुप ले लिया। आपको बता दें कि अशोक कपूर की पत्नी मधु और यस बैंक के फाउंडर तथा सीईओ राणा कपूर के बीच बैंक के मालिकाना हक को लेकर लड़ाई शुरु हो गई, मधु अपनी बेटी के लिये बोर्ड में जगह चाहती थी, मामला मुंबई की अदालत तक पहुंचा और राणा कपूर को जीत हासिल हुई।

राणा कपूर को बेचने पड़े शेयर्स
कर्ज चुकाने के लिये प्रमोटर्स ने धीरे-धीरे बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचनी शुरु की, अक्टूबर 2019 में नौबत यहां तक आ गई कि राणा कपूर तक को अपने शेयर बेचने पड़े, और यस बैंक में उनके ग्रुप की हिस्सेदारी घटकर 4.72 रह गई। बैंक के सीनियर पोस्ट्स पर मौजूद लोगों में से भी कई ने यस बैंक का साथ छोड़ा, जिसमें सीनियर ग्रुप प्रेसिडेंट रजत मोंगा भी शामिल रहे। यस बैंक पर गहराते संकट के बादल देख सरकार मदद के लिये आगे आई, केन्द्र सरकार और आरबीआई ने मिलकर बैंक को सहारा दिया, एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने यस बैंक में 2450 करोड़ के निवेश की योजना बनाई और बैंक की मदद की।

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