महिला होने की वजह से नहीं मिली नौकरी, तो 1200 रु से अपने दम पर खड़ी कर दी 50 हजार करोड़ की कंपनी

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एक महिला को अपने जीवन में बहुत सारे संघर्ष करने पड़ते हैं फिर चाहे वो बात नौकरी की ही क्यों न हो. कई बार महिलाओं को नौकरी नहीं दी जाती और एक ऐसी ही महिला है जिन्हें नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने खुद ही 50 हजार करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी और उन्हें पद्मश्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है. हम बात कर रहे हैं बायोकॉन (biocon) लिमिटेड की चेयर पर्सन किरण मजूमदार शॉ (kiran mazumdar shaw) की. जिन्होंने हाल ही में ट्वीट कर बताया अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी है. साथ ही बताया उन्हें हल्के लक्षण हैं.

1200 रुपये से शुरू की थी कंपनी
देश के सबसे बड़े बायो फार्मा कंपनी की संस्थापक किरण मजूमदार फेडरेशन यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर चुकी हैं. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि, kiran-mazumdar-shaw उन्होंने 1200 रुपये से कंपनी की शुरुआत की थी और आज वही कंपनी 50 हजार करोड़ रुपए की है. किरण मजूमदार को फोर्ब्स मैगजीन ने दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में भी शामिल किया है.

25 की उम्र में पहली नौकरी
किरण मजूमदार को 25 साल की उम्र में स्कॉटलैंड में नौकरी मिली थी. उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में बेंगलुरु में हुआ था. लेकिन उन्हें कई कंपनियों ने नौकरी देने से मना कर दिया था. दरअसल, साल 1978 में किरण मजूमदार ऑस्ट्रेलिया से शराब बनाने kiran-mazumdar-shaw-biocon की प्रक्रिया में मास्टर्स की डिग्री लेकर भारत लौंटी थीं और उन्होंने भारत में कई बीयर कंपनियों से नौकरी के लिए संपर्क किया था. लेकिन सब कंपनियों ने लेने से साफ इनकार कर दिया था. जब भारत में उन्हें मौका नहीं मिला तो वह स्कॉटलैंड चली गईं और वहां जाकर ब्रूवर की नौकरी की. यहीं से उनकी किस्मत ने ऐसी पलटी मारी कि उन्होंने खुद की कंपनी की शुरुआत करने के बारे में सोचा.

ऐसे शुरू हुई थी बायोकॉन
किरण मजूमदार के अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा था और वह आगे बढ़कर नाम कमाना चाहती थीं. इसी हौंसले और आत्मविश्वास ने उन्हें कामयाबी दिलाई. जब वह स्कॉटलैंड में काम कर रही थीं तभी उनकी मुलाकात आइरिश उद्यमी लेस्ली औचिनक्लॉस से हुई. kiran-mazumdar लेस्ली उस वक्त भारत मं फार्मा सेक्टर में अपना कारोबार शुरू करने के बारे में विचार कर रहे थे.जब उन्होंने किरण के अंदर छुपी प्रतिभा और काम की लगन देखी तो उन्होंने किरण को भारत में कारोबार संभालने के लिए कहा. लेकिन किरण ने मना कर दिया. क्योंकि, उन्हें इस सेक्टर में कोई भी एक्सीपिरियंस नहीं था. मगर लेस्ली ने उन्हें किसी तरह मना ही लिया और इस तरह बायोकॉन अस्तित्व में आई और वही महिला दुनिया की शक्तिशाली महिलाओं में शामिल हो गई. जिसे लोग नौकरी नहीं देना चाहते थे.

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